359. तीरगी में उजास! पागल है ?
तीरगी में उजास! पागल है?
उनसे मिलने की आस! पागल है?
नागफनियों की छाँव में ख़ुशबू
और गुलाबों में बास! पागल है?
जिसकी गिनती है नौ न तेरह में
उसको कहता है ख़ास! पागल है?
एक दीपक बुझा, नगर सारा
हो गया बदहवास! पागल है?
देखकर मौज की अदा 'माँझी'
आज है जो उदास, पागल है?
--देवेन्द्र माँझी
('हादिसा हूँ मैं' से)
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