296. मेरी नज़र में यूँ पड़ा वो एक दिन
मेरी नज़र में यूँ पड़ा वो एक दिन
दिल की अँगूठी में जड़ा वो एक दिन
दिल पर किसी की बात का ये था असर
बस रह गया बुत-सा खड़ा वो एक दिन
जो धूप से लड़कर बना साया सदा
थक-हारकर गिर पड़ा वो एक दिन
दिन में सितारे दीख सबको ही गए
यूँ बात पर अपनी अड़ा वो एक दिन
रहता है 'मांझी' चिड़चिड़ा-सा आजकल
इक मौज से ही लड़ पड़ा वो एक दिन
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