Tuesday, September 6, 2016

364.  तेरी ज़द से दूर था --ऐसा न था 


तेरी ज़द से दूर था --ऐसा न था
तूने ही मुझको कभी समझा न था

चाहता हूँ भूलना ये सोचकर
जो हुआ, जैसा हुआ, अच्छा न था

तेरी आँखों ने लिखी है दास्ताँ
वर्ना मेरा तो कोई क़िस्सा न था

क्यों है अब दिल में बिछुड़ने का मलाल
जानेवाले क्या तुझे रोका न था

साथ ही यादें भी मर जातीं तेरी
क्या करूँ पल-भर भी मैं तन्हा न था

इसलिए सीमा में थी 'माँझी' नदी
मौज की ठोकर से तट टूटा न था
                            -देवेन्द्र माँझी

('हादिसा हूँ मैं' से )

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