289. शीशा लेकर आये कौन
शीशा लेकर आये कौन
सर अपना फुड़वाए कौन
जेबें खाली हैं बापू की
बच्चे को समझाए कौन
जिसका उत्तर, लटके चेहरे
ऐसा प्रश्न उठाए कौन
सिर्फ़ उजाला पाने को
घर में आग लगाए कौन
लहरों की आखें हैं लाल
'माँझी' बनकर आये कौन
-देवेन्द्र माँझी
(मजबूरियाँ मेरी' से)
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