Thursday, November 26, 2015

260. साज़ गया, संगीत गया 


साज़ गया, संगीत गया
मौसम हमसे जीत गया

मन का पंछी चौंच में ये
भरकर कैसी प्रीत गया

उससे हारी ये दुनिया 
ख़ुद से जो भी जीत गया

देख मुहब्बत का मंज़र
क्यों मन हो भयभीत गया

आज बताओ 'माँझी' क्यों
सारा सागर रीत गया
                    -देवेन्द्र माँझी

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