दीपावली की शुभ-कामनायें
-------------------------------सभी मित्रों को दीपाववली के पावन पर्व पर हार्दिक शुभ-कामनायें.
-देवेन्द्र मांझी
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पूजन तो करें मगर संदेश भी समझें
------------------------------------मित्रो,
दीपावली पर अक्सर सभी लोग गणेश और लक्ष्मी की पूजा करते हैं. धूप-दीप से पूजा करके हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं और उस संदेश की ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं देते जो हमारे इष्ट-देव हमें देने का प्रयास करते हैं. यही वजह है कि दीवाली के पूजन के उपरान्त भी हमारी स्थिति जस-की-तस बनी रहती है और भविष्य में कोई नई बहार आती दिखाई नहीं देती. आइये, इस बार हम अपने इष्ट-देव के संदेश को समझें और जीवन में नई बहार लायें---
मित्रो,
वास्तव में सभी देवी देवताओं के अनोखे रूप हमें कुछ-न-कुछ संदेश देने के लिये ही हैं. इन रूप-स्वरूपों की पूजा का विधान तो महज इसलिये रखा गया है कि पूजा के नाम पर आप अपने तन-मन की पवित्रता के साथ उपस्थित रहें. उसके बाद आप गणेशजी के स्वरूप को निहारें. ्सबसे पहले आप देखेंगे की एक चौडा माथा है, फ़िर देखेंगे कि दो बडे-बडे कान हैं, फ़िर आपको दो छोटी-छोटी आंखें भी दिखाई देंगी, उसके बाद चार भुजायें दिखाई देंगी. उसके बाद आपको दो बडे-बडे दांत और एक लम्बा सूंड दिखाई देगा. इसके बाद मोटा पेट दिखेगा. मज़े की बात यह है कि हाथी का डीलडौल छोटे-से चूहे पर सवारी करता नज़र आता है.
मित्रो, क्या कभी आपने इस स्वरूप पर कोई चिंतन करने का प्रयास किया? नहीं, तो आइये हमारे साथ---करते हैं इसपर चिन्तन.
सबसे पहले जो बडा माथा दिखाई देता है---वह हमें संदेश देता है कि हमेशा अपना मस्तिष्क बडा रखें और हर बात या विचार को उसमें आने दें. दो बडे कानों की परिकल्पना भी इसी लिये की गयी है कि हर बात को पूरी तरह से सुनें और उसे बडे मस्तिष्क तक पहुंचायें. उस के बाद दो छोटी-छोटी आंखें चिन्तन की स्थिति की ओर इशारा करती हैं, आप जानते ही हैं कि जब आदमी चिन्तन की मुद्रा में होता है तो उसकी आंखें कुछ सिकुड जाती हैं. अत: छोटी आंखें संदेश देती हैं कि जो कुछ भी आपने अपने विशाल मस्तक में इकट्ठा किया है, उस पर भरपूर चिन्तन करो, तथा इस चिन्तन के लिये लम्बा सूंड भी कुछ कहता है. वह इशारा करता हुआ सन्देश देता है कि मस्तक में आई हुई बातों पर कोई निर्णय लेने से पहले अपनी नाक को ज़रा लम्बी करके सूंघो कि उनमें किसी तरह की साजिश की बू तो नहीं आ रही, अगर आपको ज़रा भी साजिश की बू लगे तो उस बात को अपने मस्तक से ऐसे झटक दो जैसे हाथी अपनी सूंड से ज़ोर की हवा निकालकर झटकता है. अब रही चार भुजाओं वाली बात---इसका सीधा मतलब है कि अपने अन्दर दो भुजायें रखनेवाले आम आदमी से दोगुना अधिक ताक़त संजोयें, ताकि कोई आपको बेवजह परेशान करने का साहस न कर सके. अब रही दो लम्बे दांतों की बात. आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि ’हाथी के खाने के और, दिखाने के और’. मित्रो, यही जीवन का सत्य है, जैसे हम घर में बच्चों को शरारत करने पर उन्हें घुडकी देकर डांटते हैं तो यह सिर्फ़ उन्हें डराने के लिये है, मारने के लिये नहीं. ठीक इसी तरह आप भी अपने व्यवहार को एकदम ऐसा मीठा और कोमल भी न बनाकर रकें कि हर कोई उसे खाने का साहस जुटाने लगे. डर से अनुशासन का़उअम रहता है, महज यही समझाने के लिये बडे दांतों की परिकल्पना की गई है. अब आते हैं उस हास्यास्पद स्थिति की ओर जहां एक तरफ़ तो गणेशजी मोटा पेट लिये हैं और दूसरी तरफ़ चूहे पर सवारी कर रहे हैं. सामन्य अवस्था में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि यह कैसे हो सकता है.
मित्रो, मैनें पहले ही लिखा है कि यह स्वरूप कुछ संदेश देने के लिये है.
मोटे पेट का मत्लब है कि आप अपना पेट इतना बडा रखें कि अपने पास आनेवाली सभी बातों को उसमें पचा सको, क्योंकि अगर आपने अपने पास आनेवाली बातों को अपने ही पेट में नहीं पचाया और मोहन की बात सोहन को तथा राम की बात शाम को बताने की कोशिश की तो विवादास्पद स्थिति का बनना और झगडा होना तै है, उसी विवाद और झगडे से बचने के लिये मोटे पेट की कल्पना की गई है, न कि अधिक खाने के लिये.
अब रह गई चूहे पर सवारी करने की बात---मित्रो, इसका सीधा सन्देश है कि जिस प्रकार इतना विशालकाय होते हुए भी गणेशजी छोटे से चूहे पर सवारी कर लेते हैं और चूहा उनके बोझ को अपने शरीर पर लेने में कभी आना-कानी नहीं करता, उसी प्रकार आप भी ध्यान रखें कि किसी पर पूरी तरह आश्रित न हों, अपना वजन इतना सीमित करके रखें कि लोग, रिश्तेदार आपको देखकर अपका स्वागत करें, वे आपको कोई बोझ न समझें, अगर वे आपको बोझ समझने लगेंगे या आप उनपर बोझ बनने लगेंगे तो आपके अपने ही आपसे मुंह चुराने लगेंगे और आप उपेक्षा के शिकार हो जायेंगे.
मित्रो, अब आप देखिय कि उपरोक्त संदेश के अनुसार अगर आप चलते हैं तो यकी़नन आपके जीवन में नई बहार आयेगी--ऐसा मेरा मानना है, और आप भी उसी तरह लक्ष्मी अर्थात धन-दौलत औरखुशियों की गोद में खेलते नज़र आयेंगे, जैसे गणेशजी लक्ष्मी जी की गोद में।
(मित्रो, अगर आप मुझसे सहमत है तो मेरे लेख को आप भी पोस्ट ्करें)
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