341. ख़ुद को साफ़ बचा लो तुम
ख़ुद को साफ़ बचा लो तुम
वहम न दिल में पालो तुम
मैं तो इनसे ऊब गया
मेरे ख़्वाब सम्हालो तुम
चुप सबकी मजबूरी हो
ऐसा प्रश्न उछालो तुम
अँधियारे को शरण न दे
दीपक को समझालो तुम
आने वाला है तूफ़ान
'मांझी' नाव सम्हालो तुम
-देवेन्द्र माँझी
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