326. सांस लेने को ज़िन्दगी कह दूँ
सांस लेने को ज़िन्दगी कह दूँ
आँख हो नम तो क्यों ख़ुशी कह दूँ
मैं अगर हूँ तो क़द्र है तेरी
तुझसे ये बात राज़ की कह दूँ
इसलिए कह रहा हूँ मेरे हो
तुमने चाहा है मैं यही कह दूँ
तू अँधेरे की सिर्फ़ चाहत है
तुझसे ये बात चाँदनी कह दूँ
रोक लो नाव टुक अभी 'माँझी'
बात अपनी मैं आख़िरी कह दूँ
-देवेन्द्र माँझी
(हादिसा हूँ मैं' से)
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