Sunday, May 15, 2016

330. जब से तन्हा रहता हूँ 


जब से तन्हा रहता हूँ
सचमुच काफ़ी अच्छा हूँ

मेरी हालत क्या पूछो
शाख से टूटा पत्ता  हूँ

आँख ज़माने की भीगीं
ख़ुद से ऐसा रूठा हूँ

मुझमें-तुझमें फ़र्क़ है क्या
अब आकर मैं समझा हूँ

कहने को बस 'माँझी' हूँ
लहर-लहर में डूबा हूँ
                  -देवेन्द्र माँझी

(हादिसा हूँ मैं' से)

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