Tuesday, December 15, 2015

273.  गुम हुआ है क़हक़हा फुटपाथ पर 


गुम हुआ है क़हक़हा फुटपाथ पर
पढ़ रहा हूँ मर्सिया फुटपाथ पर

पूछते हैं सब ये किसका पाप है
देखकर बच्चा पड़ा फुटपाथ पर

दिन में तू सारा जहाँ अपना समझ
रात में बिस्तर लगा फुटपाथ पर

मैंने पूछा ज़िन्दगी तू है कहाँ
चीख़कर उसने कहा--'फुटपाथ पर'

आज 'माँझी' सागरों को क्या हुआ
नाव जो तू ला रहा फुटपाथ पर
                          -देवेन्द्र माँझी

(मजबूरियाँ मेरी' से)

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