11. अपना बचपन जो छल गए बच्चे
अपना बचपन जो छल गए बच्चे
कौन-सा पी गरल गए बच्चे
उंगलियाँ अब नहीं पकड़ते वो
अपने पाँवों पे चाल गए बच्चे
क्या बुज़ुर्गों-सी बात करते हैं
ख़ुद-से आगे निकल गए बच्चे
छीन ली इनकी मुस्कुराहट क्यों
वक़्त को क्यों ये खल गए बच्चे
दोष इनको भला मैं कैसे दूँ
जैसा ढाला ये ढल गए बच्चे
-देवेन्द्र माँझी
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