24. आपको कैसे बताएँ क्या से क्या-क्या बन गए
आपको कैसे बताएँ क्या से क्या-क्या बन गए
अपनी ही नज़रों में हम ख़ासा तमाशा बन गए
सिरफिरा बादल हुआ इस बार हमपर मेहरबाँ
तपते रेगिस्तान थे पल-भर में दरिया बन गए
वक़्त ने बदली जो करवट सब उलटकर रह गया
थे कभी तो हम मुसाफ़िर आज रस्ता बन गए
गर्दिशों को यूँ चुनौती दी कि सब चौंके यहाँ
सर पे अपने धूप लेकर हम ही साया बन गए
जब चला पानी पे "माँझी" अपनी ज़िद को ठानकर
थे भँवर के दायरे जो वो ही नैया बन गए
-देवेन्द्र माँझी
No comments:
Post a Comment