Thursday, May 21, 2015

4.    दिल से नफ़रत को पहले मिटा दो 

           दिल से नफ़रत को पहले मिटा दो 
           फिर फ़सीलों से मुझको सदा दो 

           अपना उजला बदन देख लेंगे 
           आईना, आईनों को दिखा दो 

           शाम का हो रहा है धुँधलका 
           दीप चौखट पे अब तो जला दो 

           हम नई भोर के हैं चितेरे 
           रात की कालिमा को हटा दो 

          शीशमहलों के वारिस हमीं हैं 
          पत्थरों को हमारा पता दो 

         दोस्तों से मुझे जो मिला है 
         मेरे कपड़े उतारो दिखा दो 

         बनके "माँझी" करिश्मा करो ये 
         नाव तूफ़ाँ से साहिल पे ला दो 
                               देवेन्द्र माँझी 

शब्दार्थ -फ़सीलों =परकोटा, नगर के चारों ओर की ऊँची दीवार. 
          

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