8. हाँ, कभी सूरज, कभी चन्दा मुझे होना पड़ा
हाँ, कभी सूरज, कभी चन्दा मुझे होना पड़ा
और तुमको क्या बताऊँ, क्या मूझे होना पड़ा
सर पटककर मर रही थी जो कि रेगिस्तान में
बारहा उस धूप का साया मुझे होना पड़ा
सब इसी ज़िद पर अड़े थे कुछ नया हो, कुछ नया
क्या करूँ मजबूर था नंगा मुझे होना पड़ा
देख ही लूँ मैं कभी तस्वीर सीधी आपकी
इस भरम में बारहा उलटा मुझे होना पड़ा
बर्फ़ की मानिन्द ही "माँझी" रहा मेरा जमाव
वक़्त आड़े आ गया दरिया मुझे होना
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ -1. बारहा=बारम्बार
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