21. जीवन जीना ख़ास नहीं है
जीवन जीना ख़ास नहीं है
बस मुझको अभ्यास नहीं है
जीकर भी क्या होगा बोलो
दो-पल हँसना रास नहीं है
उस रिश्ते से कैसा रिश्ता
जो अब दिल के पास नहीं है
छोड़ गए घर की दहलीजें
अब मिलने की आस नहीं है
गुज़रा है अब सर से पानी
"माँझी" दरिया रास नहीं है
-देवेन्द्र माँझी
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