6. प्यार-मुहब्बत के थे जिनमें शब्द यहाँ पर्याय सभी
प्यार-मुहब्बत के थे जिनमें शब्द यहाँ पर्याय सभी
फाड़ दिए अपनी पुस्तक से तुमने क्यों अध्याय सभी
बस, उन कामों में ही हम नाकाम सदा होते आए
जिनमें शामिल हम कर बैठे यारों की भी राय सभी
हारी बाज़ी, घोर अँधेरा और तेरी चाहत की टीस
अपनी तो बस पूँजी ये है, ये है अपनी आय सभी
सब्र का बाँध नहीं टूटा है ख़ैर मना ले तू अपनी
सह जाते हैं बोझिल मन से जो तेरे अन्याय सभी
पौंछ पसीना "माँझी" अपना पार लगानी है कश्ती
तूफ़ाँ ख़ुद बतला जाएँगे तुझको आज उपाय सभी
-देवेन्द्र माँझी
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