197. जानता हूँ कि तू गुज़रेगी सबा मेरे बाद
जानता हूँ कि तू गुज़रेगी सबा मेरे बाद
क्या हुआ फूल गुलिस्ताँ में खिला मेरे बाद
एक दिन ऐसा भी आएगा भरी महफ़िल में
होगा महताब कोई जलवानुमा मेरे बाद
ज़िन्दगी ज़हर-सी लगती है ये तन्हाई में
क्या ही अच्छा था कि तुम होते ख़फ़ा मेरे बाद
दर्दे-दिल अब न सुनेगा कोई आवाज़ तेरी
लोग बाज़ार से लाएँगे दवा मेरे बाद
जल्द कश्ती को किनारे से लगा ले "माँझी'
और आएँगे ये तूफ़ानो-बला मेरे बाद
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. समीर, प्रात:काल की ख़ुशबू-भरी हवा, 2. महताब=चाँद, 3. जलवानुमा=दृष्टिगोचर, 4. तूफ़ानो-बला=भयंकर तूफ़ान।
('क्यों सभी ख़ामोश हैं' से)
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