200. इक नया फूल खिलाया जाए
इक नया फूल खिलाया जाए
फिर कहीं दिल को लगाया जाए
सो गए हैं जो लहद में जाकर
उनको फिर होश में लाया जाए
दोस्त से प्यारा है दुश्मन अपना
सोचकर हाथ मिलाया जाए
सारे सुकरात नज़र आते हैं
ज़हर किस-किसको पिलाया जाए
कितनी तारिक-फ़ज़ा है 'माँझी'
चाँद दरिया में उगाया जाए
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. लहद=क़ब्र, समाधि, 2. तारिक-फ़ज़ा=तिमिर वातावरण, अँधेरा।
('क्यों सभी ख़ामोश हैं' से)
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