Monday, September 28, 2015


 216. मेरे  लिखे हुए को किताबों में देखना 


मेरे  लिखे हुए को किताबों में देखना 
आइन्दा फिर कभी मुझे ख़्वाबों में देखना 

आ जाएँगे वो आईने में खुलके सामने 
गुज़रे हुए समय को निक़ाबों में देखना 

आये अगर न बाज़ मुहब्बत के खेल से 
उनका भी हश्र खाना-ख़राबों में देखना 

मासूम भोली-भाली सी कलिओं की मस्तियाँ 
जब ये जवान हो तो हिजाबों में देखना 

साहिल पे अब नज़र नहीं आएँगे फिर कभी 
'माँझी' अब उनका नाम हुबाबों में देखना 
                                      -देवेन्द्र माँझी 

-शब्दार्थ--1. निक़ाबों में=परदे में, घूँघट में, 2. हश्र=परिणाम, 3. हिजाबों में=पर्दों में, 4. हुबाबों में=बुलबुलों में। 

('क्यों सभी ख़ामोश हैं' से)

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