139. जब तक दामन थाम न ले
जब तक दामन थाम न ले
जलकर उनका नाम न ले
शहर में तू ही क़ातिल है
सर पे ये इल्ज़ाम न ले
खुलकर आ मैख़ाने में
चोरी-चोरी जाम न ले
शाम से पहले शमअ़ जलाकर
बेसब्री से काम न ले
"माँझी" नाव में बैठे-बैठे
मौजों को तहे-दाम न ले
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. मौजों को=लहरों को, 2. तहे-दाम=फंदे में या बन्धन में।
( "समन्दर के दायरे" से)
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