176. उनकी यादों को भुलाया न गया
उनकी यादों को भुलाया न गया
ज़ख़्म सीने में छुपाया न गया
लोग आवारा मुझे कहते हैं
मैं यहाँ से कहीं आया न गया
उफ़! सरे-शाम मेरी मजबूरी
इक दिया था कि जलाया न गया
कितने कमज़र्फ़ हैं मिलनेवाले
बज़्म में मुझको बुलाया न गया
चाँद लगते थे जो छाँव के तले
आईना उनको दिखाया न गया
आज क्या बात है "माँझी" आख़िर
नाव को पार लगाया न गया
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. कमज़र्फ़=तुच्छ विचारवाले , 2. बज़्म=महफ़िल।
("क्यों सभी ख़ामोश हैं" से)
No comments:
Post a Comment