150. वो तअक़्क़ुब में था लुटा कैसे
वो तअक़्क़ुब में था लुटा कैसे
पीछे मुड़कर में देखता कैसे
तेरे बीमार ने शिफ़ा पाई
अब करेगी असर दवा कैसे
बढ़ गया इतना शाम होते ही
तेरी यादों का सिलसिला कैसे
इन खुदाओं के दरम्याँ रहकर
कोई माँगेगा अब दुआ कैसे
"माँझी" सोया हुआ है दरिया में
मौज दिखलाए अब अदा कैसे
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. तअक़्क़ुब में=पीछे लगा हुआ, पीछा करता हुआ।
("समन्दर के दायरे" से)
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