178. बाद मुद्दत के मेरा नाम आया
बाद मुद्दत के मेरा नाम आया
आपका देर से पैग़ाम आया
और से अहदे-वफ़ा कर बैठा
जब तेरे कूचे से नाकाम आया
टूट जाएगी ये तौबा साक़ी
तेरे हाथों से अगर जाम आया
सुबह का वादा तेरा क्या कीजे
याद आया तो सरे-शाम आया
क्यों न हो शहर ये पागल "माँझी"
चाँद अमावस में लबे-बाम आया
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. अहदे-वफ़ा=वफ़ा की सौगन्ध खाना, 2. कूचे से=गली से, 3. लबे-बाम=छत पर।
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