113. तल्ख़ बातों को छोड़कर देखो
तल्ख़ बातों को छोड़कर देखो
टूटे रिश्तों को जोड़कर देखो
आग लग जाएगी बहारों में
सर्द आहों को छोड़कर देखो
कितनी नफ़रत टपक के गिरती है
अपना दामन निचोड़कर देखो
आज कुछ खलबली-सी मचती है
रुख़ हवाओं का मोड़कर देखो
तोड़ना है अगर तुम्हें "माँझी"
ज़ोर तूफाँ का तोड़कर देखो
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. तल्ख़=कड़वी।
(समन्दर के दायरे से )
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