137. बन्दे से बहुत दूर है बन्दे का ख़ुदा भी
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बन्दे से बहुत दूर है बन्दे का ख़ुदा भी
बदली हुई है आज ज़माने की हवा भी
तूफ़ान-ए-बला सैकड़ों गुज़रे मेरे सर से
जुम्बिश नहीं आई मेरे पैरों में ज़रा भी
आँखों से अगर अश्क बहे जाएँ तो फिर क्या
मौसम हो सुहाना तो बरसती है घटा भी
छाँव में कोई फ़र्क़ न आएगा सरे-राह
क्या हो गया इक पत्ता हवाओं में गिरा भी
"माँझी" ये तेरी नाव को पता भी न चलेगा
तूफ़ान अगर गहरे समन्दर में उठा भी
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ--1. तूफ़ान-ए-बला=भयानक तूफ़ान, 2. जुम्बिश=कम्पन, 3. सरे-राह =राह में।
(समन्दर के दायरे से)
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