39. अलविदा कहकर गई थी तीरगी ऐसा भी था
अलविदा कहकर गई थी तीरगी ऐसा भी था
और सूरज पर चढ़ी थी बेबसी ऐसा भी था
इस सियासत ने बदल डालीं सभी सूरत यहाँ
आदमी बस आदमी था, आदमी ऐसा भी था
देखकर बीते दिनों की अपनी ही तस्वीर को
यूँ ठगा-सा रह गया मैं क्या कभी ऐसा भी था
इस बदन के नाज़-नख़रे झलती देखी गई
ज़िन्दगी ख़ुद में बनी थी दिल्लगी ऐसा भी था
वो रुलाकर ही रहेगा याद जब भी आएगा
हाँ, हमारे बीच लफ़्ज़े-आख़िरी ऐसा भी था
वो जलाता ही रहा "माँझी" सभी चप्पू मेरे
इस ज़ेहन में इक समन्दर आतिशी ऐसा भी था
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ-1. तीरगी=अँधेरा, 2. लफ़्ज़े-आख़िरी=अन्तिम शब्द, 3. आतिशी=आग से भरा हुआ .
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