72. इससे पहले कि जुदाई का मुझे तू डर दे
इससे पहले कि जुदाई का मुझे तू डर दे
एक एहसान ये कर, मुझको ही पागल कर दे
आन बैठें न कबूतर ही मुहब्बत के कहीं
इन मुँडेरों को अभी काँच से पूरी भर दे
तेज़-रफ़्तार हवाओं ने कहा पतझड़ से
आज हर पेड़ गुलशन में तू नंगा कर दे
जब ये भगवान बने बैठे हैं गूंगे-बहरे
इनको अहसास का दमदार-सा इक नश्तर दे
आज हालत तुझे जिस मोड़ पर लाये "माँझी"
मोम की नाव बना, आग का दरिया कर दे
-देवेन्द्र माँझी
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