50. जहाँ मकान किसी लौ से जल गए होंगे
जहाँ मकान किसी लौ से जल गए होंगे
वहाँ चिराग़ के मानी बदल गए होंगे
तलाश करना है बेसूद खोने वालों को
किसी अँधेरी गली में निकल गए होंगे
मिज़ाज गर्म था उनका ये कहना भूल गया
ज़रा-सी बात पर तेवर बदल गए होंगे
तमाम रात मेरा घर में इन्तिज़ार के बाद
न पाके बच्चे खिलौने मचल गए होंगे
उड़ान भरते थे बे-पर ही जो ख़लाओं में
वो एक झटके से "मांझी " सम्हल गये होंगे
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ-1. मानी=अर्थ, मतलब, 2. बेसूद=व्यर्थ, बेकार , निरर्थक, 3. बे-पर=बिना पंख, 4. ख़लाओं में=शून्य में .
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