28. इस घुटे माहौल में क्या-क्या न सह जाना पड़े
इस घुटे माहौल में क्या-क्या न सह जाना पड़े
जब पराई आग का भभका हमें खाना पड़े
और अपनी बेबसी का हाल हम बतलाएँ क्या
टीस सीने में हो फिर भी हमको मुस्काना पड़े
इस कदर नादान है ये दिल बताओ क्या करूँ
बात हो तो बात है, बेबात समझाना पड़े
जा रहे हो तो चले जाओ बला-से तुम मगर
देखलो फिर लौटकर तुमको न आ जाना पड़े
शाम ढलते ही न जाने क्या उसे हो जाए है
क्यों उठाकर रोज़ ही "माँझी" को घर लाना पड़े
-देवेन्द्र माँझी
09810793186
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