53. मन ये मेरा तुलसी है या मीरा है
मन ये मेरा तुलसी है या मीरा है
इन साँसों में बसता एक कबीरा है
कर दो तुम भी और इज़ाफ़ा तो क्या है
दर्दो-ग़म का मेरे पास ज़ख़ीरा है
मोती पर अधिकार उसी का है जायज़
पानी की पर्तों को जिसने चीरा है
इश्क़-मुहब्बत के चक्कर से पहले तो
सब मुझको भी कहते थे "ये हीरा है"
"माँझी" में है बात यही कहने लायक़
उलझन के सागर में मस्त जज़ीरा है
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ-1. इज़ाफ़ा=बढ़ोतरी, 2. ज़ख़ीरा=कोष, खज़ाना, 3. जज़ीरा=द्वीप, टापू।
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