37. हर-पल उनका ही चर्चा है --छोड़ो भी
हर-पल उनका ही चर्चा है --छोड़ो भी
जितने दूर रहें अच्छा है --छोड़ो भी
देखके शीशा लाल हुआ तो होने दे
ख़ुद को जाने क्या समझा है --छोड़ो भी
मैं कैसा हूँ, तू कैसा है, कैसा वो
इन बातोँ में क्या रक्खा है --छोड़ो भी
और कसाव बढ़े है उस पल बाहों का
कोई मचलकर जब कहता है --छोड़ो भी
नाव चलाकर "माँझी" क्या हासिल होगा
दरिया जन्मों से सूखा है --छोड़ो भी--छोड़ो भी
-देवेन्द्र माँझी
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