32. रात-भर खेला जो मुझसे ख्वाब-सा वो कौन था
रात-भर खेला जो मुझसे ख्वाब-सा वो कौन था
रख दिया दिल को खिलौना-सा बना वो कौन था
काश ! रहता होश में मैं जब वो आया था क़रीब
उससे मिलता, बात करता, देखता वो कौन था
पहली चाहत आप थे जो याद हैं अब-तक मुझे
क्या बताऊँ दूसरा, फिर तीसरा वो कौन था
जानने वाले सभी अनजान ऐसे बन गए
मैं चला तो कह उठे --वो कौन था, वो कौन था
डूबने वालों ने तो समझा था "माँझी" ही उसे
नाव लेकर जो चला था क्या पता वो कौन था
-देवेन्द्र माँझी
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