85. यूँ ही न बैठ, उठ खड़ा हो, चल तलाश कर
यूँ ही न बैठ, उठ खड़ा हो, चल तलाश कर
दुनिया की आँख में ज़रा तू जल तलाश कर
रह भी न पाएँगे यहाँ दो एक साथ में
मुझ-सा न कोई दूसरा पागल तलाश कर
तुझसे न खेला जाएगा ये खेल इश्क़ का
बच्चा है जाके माँ का तू आँचल तलाश कर
गिर जाएगा जो आ गयीं अब तेज़ आँधियाँ
बूढ़े शजर के वास्ते सम्बल तलाश कर
"माँझी" तू फिर से थाम ले पतवार हाथ में
सोये हुए सागर में तू हलचल तलाश कर
-देवेन्द्र माँझी
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