76. लोग कहते हैं, काम आते हैं
लोग कहते हैं, काम आते हैं
जिनके महफ़िल में नाम आते हैं
रूठ जाती है रौशनी जब भी
ताक के दीप काम आते हैं
कर के देखो ज़मीर का सौदा
किस कदर खुल के दाम आते हैं
एक मुद्दत हुई जिन्हें बिछुड़े
याद क्यों सुब्हो-शाम आते हैं
तू भँवर से ख़फ़ा न हो "माँझी"
इस तरह के मुकाम होते हैं
-देवेन्द्र माँझी
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