40. मुहब्बत के तराने रखके देखो
मुहब्बत के तराने रखके देखो
मिलन के तुम बहाने रखके देखो
मज़ा रातों का गर लेना है तुमको
कभी यादें सिराने रखके देखो
मिलेगा, जो मुक़द्दर में नहीं है
ये सर उस आस्ताने रखके देखो
कभी कोई परिन्दा आ ही जाए
छतों पर तुम भी दाने रखके देखो
नदी के पार जानेवाले "माँझी"
समन्दर पर निशाने रखके देखो
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ-1. सिराने=सिरहाने, 2. आस्ताने=ऋषि का आश्रम, वली की ख़ानक़ाह.
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