82. भावनाओं का दमन कर लें ज़रा
भावनाओं का दमन कर लें ज़रा
आपको भी हम नमन कर लें ज़रा
हम वसूलेंगे फिरौती मौत से
ज़िन्दगी का अपहरण कर लें ज़रा
साफ़ ये वातावरण क्यों है नहीं
आओ ! हम चिंतन-मनन कर लें ज़रा
तितलिओं के पर नहीं छिद पाएँगे
कंटकों को हम सुमन कर लें ज़रा
फिर खुले आकाश को देंगे सदा
आँख-भर अपना गगन कर लें ज़रा
नाव भी "माँझी" तटों पर लाएँगे
हम भँवर का आचमन कर लें ज़रा
-देवेन्द्र माँझी
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