83. जीवन के सरगम को ख़ास तराने दो
जीवन के सरगम को ख़ास तराने दो
गीत मुझे भी अपने मन का गाने दो
अपनेपन की शीतल छाया दो मुझको
थककर चूर हुआ हूँ अब सुस्ताने दो
सूरज सर पर आया, पलकें खुल जाओ
ख़्वाबों के झुरमुट को अब अलसाने दो
क़त्ल करूँ क़ातिल आदर्शों का मैं भी
मेरे हाथों में भी तुम दस्ताने दो
दूर हटो तूफ़ानी लहरो "माँझी" को
आज किनारे अपनी कश्ती लाने दो
-देवेन्द्र माँझी
09810793186
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