84. हाँ, ख़ुशी मिल जाएगी हमको इसी परिणाम से
हाँ, ख़ुशी मिल जाएगी हमको इसी परिणाम से
जान लें ये लोग बस हमको हमारे नाम से
कौन कैसा है, करे क्या, क्या करेंगे जानकर
गुठलियाँ हम क्यों गिनें, मतलब हमें है आम से
सच बताऊँ काम आते हैं वही तो आजकल
इस नगर में वो जो चहरे हैं बहुत बदनाम से
भावनाओं की नहीं क़ीमत यहाँ कुछ, जान लो
काम चलता है यहाँ पर अंटिओं के दाम से
रात का आलम नहीं देखा है उसने आज-तक
डूब-सा जाता है "माँझी" किस नदी में शाम से
-देवेन्द्र माँझी
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