65. इसलिए सम्बन्ध तुमसे रास कब आया मुझे
इसलिए सम्बन्ध तुमसे रास कब आया मुझे
मैंने क्या समझा था तुमको, तुमने क्या जाना मुझे
दूसरों की बात पर ही हम यक़ीं करते रहे
मैंने कब जाँचा था तुमको, तुमने कब परखा मुझे
दोस्ती और प्यार का ही मैं सदा क़ायल रहा
और दुनिया में नहीं कुछ भी लगा अच्छा मुझे
मैं तो इक बिन्दू था फिर यूँ जाने आख़िर किसलिए
बिन्दुओं के बीच की रेखा गया समझा मुझे
साफ़ "माँझी" दीखता है उसके मन में खोट है
जिस नज़र से देखता है आजकल दरिया मुझे
-देवेन्द्र माँझी
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