33. एक दिन इनसे भी जुदा होगा
एक दिन इनसे भी जुदा होगा
जान-पहचान से भी क्या होगा
क्यों नहीं लौटते जाने वाले
बोल, तुझको तो कुछ पता होगा
आँख सबकी उधर उठी होंगी
फूल गुलशन में जब खिला होगा
इन हवाओं में आज गर्मी है
हमसफ़र कोई आग का होगा
ख़ूब "माँझी" धुआँ उठा होगा
नाम लहरों पे जब लिखा होगा
-देवेन्द्र माँझी
No comments:
Post a Comment