69. जहाँ थक जाती है दुनिया ये जाकर
जहाँ थक जाती है दुनिया ये जाकर
वहाँ किरदार तू अपना अदा कर
अँधेरों से बचाले आज सबको
उजाला कर तू अपना घर जलाकर
मैं घुट जाऊँगा अपनी क़ैद में ही
कहीं ले जा मुझे मुझसे छुड़ाकर
फ़क़ीरी के लिए रहता है पागल
ज़रा तू देख तो ले घर बसाकर
सभी बेबस हुए बैठे हैं "मांझी"
इन्हें तू पार कर चप्पू चलाकर
-देवेन्द्र माँझी
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