71. गाँव भुलाना भी मुश्किल है
गाँव भुलाना भी मुश्किल है
लौटके जाना भी मुश्किल है
मुश्किल है गर दर्द छुपाना
ज़ख़्म दिखाना भी मुश्किल है
काँटे पहरेदार बने हैं
फूल चुराना भी मुश्किल है
किसने ये हालत बनाये
आना-जाना भी मुश्किल है
नाव चले ना "माँझी" बेशक
छोड़ के जाना भी मुश्किल है
-देवेन्द्र माँझी
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