79 कैसा कमाल शोर न आहट ज़रा भी है
कैसा कमाल शोर न आहट ज़रा भी है
हालांकि हादिसों से ये मंज़र भरा भी है
पतझड़ की साज़िशों से तो जूझा है ये चमन
इसका सबूत है कि इक हिस्सा हरा भी है
नाकामियों ने कर दिया उस शख़्स को उदास
दुनिया की बात क्या है वो ख़ुदसे डरा भी है
मुझसे ज़रा जफ़ा का नया खेल खेलकर
मुझको बताओ प्यार में कोई मरा भी है
चलने से पहले देख लो किस मूड में है वो
संजीदा "माँझी" है अगर तो मसखरा भी है
-देवेन्द्र माँझी
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