61. क्यों रुका है क़ाफ़िला, क्या बात है
क्यों रुका है क़ाफ़िला, क्या बात है
क्या हुआ, कर ले पता, क्या बात है
चाल टेढ़ी चल रही है ये हवा
किसका पूछे है पता, क्या बात है
इक सदा रोने की आई है अभी
देख लूँ पर्दा उठा, क्या बात है
रौशनी को छोड़कर वो किसलिए
तीरगी पर है फ़िदा, क्या बात है
नास्तिक भी ख़ौफ़ तेरा मानते
मानता हूँ या ख़ुदा, क्या बात है
देखकर "माँझी" के करतब नाव से
आ गया मुझको मज़ा, क्या बात है
-देवेन्द्र माँझी
शब्दार्थ-1. तीरगी=अँधेरा।
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