49. मेरा साया पास न आये, बात तो कोई होगी ही
मेरा साया पास न आये, बात तो कोई होगी ही
दूर बहुत वो मुझसे जाए बात तो कोई होगी ही
ये भी सोचा दश्ते-जुनूँ में बन्द हवा के आँचल से
धूल उड़े और सर पर आए बात तो कोई होगी ही
तन्हाई की रात में दीपक जलता-बुझता रहता है
देखके लौ को जी घबराए बात तो कोई होगी ही
कल भी तो ख़ामोश तमाशा बनके खड़े थे रस्ते में
आज भी वो कुछ बोल न पाए बात तो कोई होगी ही
ख़ूनी लहरों के घेरे से "माँझी" तेरी कश्ती को
तूफाँ ख़ुद ही पार लगाए बात तो कोई होगी ही
-देवेन्द्र माँझी
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